भोजपत्र, ताड़पत्र, कागज और ताम्रपत्रों पर प्राचीन लिपियों में लिखी हजारों पांडुलिपियों को लिपि विशेषज्ञ नहीं पढ़ पा रहे हैं। इसका कारण सिर्फ यही है कि वे पुरानी लिपियाँ अविकसित हैं। इनमें स्पष्टता का अभाव है !वर्तमान में उपयोग हो रही लिपियों में ध्वनियों को लिपिबद्ध करने की क्षमता मात्र अपनी भाषा के शब्दों के उच्चारण को लिखने तक ही सीमित है । भविष्य के पचास वर्षों में देश की लगभग चार सौ भाषाओं के विलुप्त होने की आशंका जताई गई है ! जिन भाषाओं की लिपियों में स्पष्टता का अभाव है, याने अविकसित और अल्पविकसित लिपियों में लिखी जाने वाली भाषाओं के लुप्त होने की संभावना अधिक है ! आप स्वयं लिपियों को जाँच सकते हैं ! लिपि में स्पष्टता है या नहीं ! देखें –( 1 ) जो वर्ण की ध्वनि है वही वर्ण का नाम हो !( 2 ) एक वर्ण से एक ही ध्वनि लिखी जाए !( 3 ) एक ध्वनि के लिए सिर्फ एक ही वर्ण हो !( 4 ) मूक वर्णों का प्रयोग नहीं हो !( 5 ) महाप्राण ध्वनियों के स्पष्ट संकेत हो !( 6 ) स्वर की मात्राओं के स्पष्ट संकेत हों !( 6 ) समय की एक, दो, तीन, आधी और चौथाई मात्राओं के प्रावधान हों !( 7 ) कम्प्यूटर में टाइपिंग आसान हो !( 8 ) राजभाषा हिंदी के शब्दों की शुद्ध वर्तनी लिखी जा सके !’ होडो़ सेंणा लिपि ” हजार साल पुरानी देवनागरी लिपि से विकसित लिपि है। इस लिपि में हिंदी और मुन्डा भाषाओं ( मुन्डारी, संथाली, हो ) के साथ ही अनेक भारतीय भाषाओं को भी शुद्ध वर्तनी के साथ लिख और टाईप कर सकते हैं । इस लिपि में आवश्यकतानुसार क्षेत्रीय भाषाओं की विशिष्ट ध्वनियाँ भी जोडी़ जा सकती हैं ! सम्पूर्ण जानकारी के लिए वेबसाइट देखें !

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