जय हिंद !

हजार -बारह सौ साल पहले किसी महात्मा ने ब्राह्मी लिपि का शोधन कर के नागरी या देवनागरी के स्वरूप को सामने रखा था! यह जानने पर कोई उनका आभार मानता है क्या ? आभार तो दूर की बात है, याद तक कोई नहीं करता !लिपि के माध्यम से ही भाषा लिखी जाती है ! देवनागरी लिपि से हिंदी लिखी जाती है ! ब्राह्मी लिपि के शोधन के बाद आज तक हजार -बारह सौ वर्षों के काल खंड में लिपि का उपयोग अरबों लोगों ने या इससे भी अधिक कई खरब लोगों ने किया है ! लिपि के ही जर्रिये असंख्य लोगों ने साहित्य लेखन से अपार धन और सम्मान कमाये ! अभी वर्तमान समय में करोडो़ं लोग देवनागरी लिपि का उपयोग नित्य कर रहे हैं ! धन, मान -सम्मान वैभव हिंदी भाषा और देवनागरी लिपि के माध्यम से कमा रहे हैं !इसके बावजूद हजार साल से चली आ रही लिपि की कमियों को कोई सुधारता नहीं है ! अब जब देवनागरी के शोधन के बाद ‘ होडो़ सेंणा लिपि ‘ बनी है तो किसी को भी खुशी नहीं हो रही है ! लगता है विकसित लिपि के उपयोग की जिम्मेदारी अगली पीढ़ी को दे दी जायेगी !

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