देवनागरी लिपि के स्थान पर देवनागरी लिपि से विकसित हिंदी की नई लिपि ‘ होड़ो सेंणा लिपि ‘ को अपनाने पर निम्नलिखित लाभ होंगे :—( 1 ) हिंदी बोलने वालों की संख्या विश्व में सर्वाधिक है। लेकिन देवनागरी लिपि के एक हजार साल पुरानी होने के कारण लिपि में अनेक कमियाँ हैं। कम्प्यूटर युग में लिपि के विकास की आवश्यकता है। अभी हिंदी टाइपिंग में देवनागरी के 140 ( एक सौ चालीस  ) संकेत चिह्नों की आवश्यकता होती है जबकि ‘ होड़ो सेंणा लिपि ‘ में मात्र 45 ( पैंतालीस) संकेत चिह्नों से ही स्पष्ट वर्तनी लिखी जा सकती है। लिपि आसान होने के कारण जो लोग रोमन लिपि में हिंदी लिखते पढ़ते हैं वे आसानी से होड़ो सेंणा लिपि में लिख पढ़ सकेंगे। ( 2 ) अगले 50 वर्षों में देश की 400 भाषाएँ खत्म हो जाने की आशंका से मुक्ति मिलेगी अगर देश की सभी भाषाओं को ‘ होड़ो सेंणा लिपि ‘ में लिखेंगे तो सभी लोगों के लिये अन्य प्रादेशिक भाषाएँ सीखना सहज हो जाएगा और राष्ट्रीय एकता को बल मिलेगा। ज्ञात हो कि देवनागरी लिपि की तरह ही देश की अन्य लिपियाँ भी एक हजार से बारह सौ वर्ष पुरानी है। कुछ लिपियाँ तो हाल की हैं लेकिन अल्पविकसित या अविकसित हैं। यही कारण है कि राजभाषा हिंदी / विश्व भाषा हिन्दी को क्षेत्रीय भाषाओं की लिपियों में शुद्ध वर्तनी के साथ नहीं लिखा जा सकता है। देवनागरी से विकसित ‘ होड़ो सेंणा लिपि ‘ का विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन करवाने पर उपर्युक्त बातों की सच्चाई का पता लग जाएगा। 

2 thoughts on “देवनागरी लिपि के स्थान पर होड़ो सेंणा लिपि

  1. That is very fascinating, You’re a very professional blogger.
    I have joined your rss feed and look ahead to seeking more of your
    great post. Additionally, I’ve shared your website in my social networks

  2. Thanks for a marvelous posting! I actually enjoyed reading it, you may be a great author.I
    will make certain to bookmark your blog and will come back at some point.
    I want to encourage you to definitely continue
    your great work, have a nice afternoon!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *