देवनागरी लिपि का विकास

देवनागरी लिपि का विकास ब्राह्मी लिपि का संशोधित और परिष्कृत रूप देवनागरी लिपि है। यह उस समय की आवश्यकता और सुविधा को ध्यान में रख कर की गई थी जब यह बनी थी । अब देवनागरी लिपि एक हजार साल से…

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देवनागरी लिपि के स्थान पर होड़ो सेंणा लिपि

देवनागरी लिपि के स्थान पर देवनागरी लिपि से विकसित हिंदी की नई लिपि ‘ होड़ो सेंणा लिपि ‘ को अपनाने पर निम्नलिखित लाभ होंगे :—( 1 ) हिंदी बोलने वालों की संख्या विश्व में सर्वाधिक है। लेकिन देवनागरी लिपि के…

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आप स्वयं लिपियों को जाँच सकते हैं !

भोजपत्र, ताड़पत्र, कागज और ताम्रपत्रों पर प्राचीन लिपियों में लिखी हजारों पांडुलिपियों को लिपि विशेषज्ञ नहीं पढ़ पा रहे हैं। इसका कारण सिर्फ यही है कि वे पुरानी लिपियाँ अविकसित हैं। इनमें स्पष्टता का अभाव है !वर्तमान में उपयोग हो…

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देवनागरी लिपि की कमियाँ !

1 . ग, ण,और श में आकार लगे होने का भ्रम होता है !2 . एक वर्ण के अनेक रूप —      ( क )  ‘ र ‘ ध्वनि के लिए छः संकेत चिह्न हैं —       राजा , …

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लिखने की तकनीक है लिपि

1.जो वर्ण की ध्वनि है वही उसका नाम हो ! ऐसा नहीं कि  वर्ण की ध्वनि ‘ह ‘ और नाम ‘ एच ‘ (H) 2.एक वर्ण से एक ही ध्वनि की अभिव्यक्ति हो ! A की तरह नहीं कि उच्चारण अ,आ,ए,…

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जय हिंद !

जय हिंद ! हजार -बारह सौ साल पहले किसी महात्मा ने ब्राह्मी लिपि का शोधन कर के नागरी या देवनागरी के स्वरूप को सामने रखा था! यह जानने पर कोई उनका आभार मानता है क्या ? आभार तो दूर की…

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